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भोपाल CBSE 10वीं बोर्ड रिजल्ट: टॉपर्स बोले- कोरोना काल में सेल्फ स्टडी का फायदा मिला; ग्रुप स्टडी के लिए किया सोशल मीडिया का इस्तेमाल Digital Education Portal

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 10वीं क्लास का मंगलवार को रिजल्ट आ गया। छात्रों ने दो साल से स्कूल जाए बिना ही घर पर रहकर पढ़ाई की और सफलता हासिल की है। देश भर से करीब 21 लाख छात्र-छात्राओं में से 99.04% बच्चे पास हो गए। भोपाल में टॉप करने वाले छात्रों ने माना कि मुश्किल समय में उनकी सेल्फ स्टडी की आदत उनके लिए फायदेमंद रही। वे रिवीजन और होमवर्क करने के बाद सेल्फ स्टडी करते थे। इसमें वे आगे की क्लास की स्टडी पहले से ही कर लेते थे। इससे उन्हें क्लास के दौरान टीचर्स के पढ़ाने पर चैप्टर काफी अच्छा से समझ आता था। जानते हैं ऐसे ही बच्चों की कहानी।

मानसी मनवानी (99.8%): टीचर से वाट्सऐप से किया संपर्क
सेंट जोसेफ कान्वेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल ईदगाह हिल्स की छात्रा मानसी मनवानी के 99.8% है। मानसी ने बताया कि इस दौरान सबसे बड़ा चैलेंज ऑनलाइन स्टडी करना था। स्कूल खुले नहीं होने के कारण से खुद ही पढ़ना होता था। स्कूल नहीं होने से अनुशासन बनाए रखना सबसे ज्यादा मुश्किल था, ऐसे में पहले तो खुद से नियम तय किए और फिर वाट्सऐप पर लगातार अपने साथी स्टूडेंट्स और टीचर के संपर्क में रही। स्टडी के दौरान जब भी कुछ समझ नहीं आता था, तो साथी स्टूडेंट्स और टीचर को पूछती थी। इसी तरह लगातार सभी के संपर्क में रहने का फायदा मिला।

श्रुति जैन (99.6%): कोर्स पूरा करने के लिए पढ़ाई का समय बढ़ाया
टॉपर श्रुति जैन का रिजल्ट 99.6% का रहा। श्रुति ने कहा कि वह क्लास खत्म होने के बाद दो घंटे का ब्रेक लेती थी। इसके बाद पढ़ाई शुरू करती थी। टेस्ट और परीक्षा के दौरान जब उसे लगता था कि वह जितना कोर्स करना चाह रही है वह पूरा नहीं हो पा रही है, तो स्टडी के घंटे बढ़ा देती थी। सामान्य तौर वह सुबह 7 बजे से स्टडी शुरू करती थी, लेकिन कोर्स को पूरा करने के लिए वह सुबह 6 बजे भी उठती थी। हर दिन का शेड्यूल इस तरह बनाया था कि अंत समय में ज्यादा पढ़ाई करना पड़े। इससे परीक्षा या टेस्ट के दौरान भी कभी प्रेशर नहीं पड़ा। क्लासमेट के संपर्क में रहने का भी फायदा मिला।

अनुष्का नायर (99.4%): केजी से लेकर 10वीं की कभी कोचिंग नहीं की
अनुष्का ने 10वीं में 99.4% हासिल किए। खास बात रही कि अनुष्का ने केजी से लेकर 10वीं तक कभी कोचिंग नहीं की। अनुष्का कहती है कि मेरे लिए सेल्फ स्टडी सबसे ज्यादा अहम रही। जब भी कुछ समझ नहीं आया, तो टीचर्स से पूछा। टीचर्स भी लगातार समझाते रहते थे। मम्मी-पापा ने भी कोई प्रेशर नहीं बनाया। हर दिन के शेड्यूल के अनुसार ही कोर्स को पूरा करती थी। टीचर और साथी स्टूडेंट्स से बातचीत होने के कारण कभी कोचिंग की जरूरत ही नहीं लगी। इसी कारण कभी कोई परेशानी नहीं हुई।

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