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एग्जाम के समय मैनेज करें नेगेटिव इमोशंस: नेगेटिव भावनाओं का इस्तेमाल भी खुद को बेहतर बनाने में करें

‘नकारात्मक भावनाएं, हमारे मन के दूर-दराज क्षेत्रों जहां से संपर्क टूट गया है तत्काल समाचार देने आए दूत हैं, दूतों को जान से न मारें’

– वेलेंटीना क्वार्टा, अपनी कविता द पर्पस लैडर में

करिअर फंडा में स्वागत!

स्टूडेंट्स जो एग्जाम की तैयारी में नेगेटिव इमोशंस से जूझ रहे हैं, उन्हें आज मैं बताऊंगा कि कैसे ‘नेगेटिव इमोशन’ से डरे बिना आप उन्हें पॉजिटिव बना सकते हैं।

क्या होते हैं नेगेटिव इमोशन

क्या आप भी कभी-कभी डर जाते हैं जब ‘नेगेटिव इमोशन’ दिमाग में आने लगते हैं? मॉक टेस्ट बिगड़ गया? दोस्त क्लास में आगे निकल गया?

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हम मनुष्यों में आने वाली कई भावनाओं जैसे, क्रोध, ईर्ष्या, डर, गिल्ट (अपराध बोध), बेबसी, उदासी आदि को नकारात्मक या नेगेटिव इमोशंस कहा जाता है। शायद इसलिए क्योंकि उन पर नियंत्रण नहीं होने पर हमें नकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। जैसे किसी व्यक्ति से गुस्से में की गई बातचीत हमेशा के लिए रिलेशन खराब कर सकती है इत्यादि।

सभी इमोशन आवश्यक

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इमोशंस के सिद्धांतों के अनुसार सभी भावनाएं आवश्यक होती हैं। यानी सकारात्मक या नकारात्मक भावनाएं जो भी हो, हमें किसी विशेष माहौल में बेहतर काम करने में मदद करती हैं। हमें यह जानने की जरूरत भी तो है न है कि किसी खूंखार शेर के पास नहीं जाना चाहिए।

हमारे समाज में नेगेटिव इमोशंस को दबाना सिखाया जाता है, लेकिन भावनाओं को दबाने से बुरे प्रभाव हो सकते है, जैसे अपने आप पर आ रहे गुस्से को एक्सप्रेस न करना बीमारी में बदल सकता है।

नेगेटिव इमोशन मैनेजमेंट

‘प्रकृति ने ही हमें यदि कुछ इमोशंस दिए हैं तो उनका कुछ कारण होगा’, इस बात का सम्मान करें और जब आप में नेगेटिव इमोशंस आएं तो घबराएं नहीं बल्कि उन पर नजर रख, उनके बारे में सोचें, और जानें कि किन परिस्थितियों में वे आते हैं।

इस तरह आप अपने नेगेटिव इमोशंस को अच्छे से मैनेज कर, एग्जाम परफॉरमेंस सुधार पाएंगे।

नेगेटिव इमोशंस की लिस्ट…बनाएं इन 6 को अपना दोस्त

1) क्रोध (Anger)

गुस्सा या हताशा हमारे चाहे गए परिणाम न आने, या किसी के बुरे बर्ताव से, या हमारे अपने खराब परफॉर्मेंस से, हो सकता है।

A. गुस्सा आने पर तर्कहीन व्यवहार हो सकता है, जैसे चिल्लाना, धमकी देना या मारपीट। इससे नींद और भूख तक प्रभावित हो सकती है।

B. प्रकृति ने क्रोध की अभिव्यक्ति हमें क्यों दी है? ताकि उन स्थितियों को जिनसे हमें नुकसान हो सकता हैं…उन्हें हम दूर भगा सकें।

C. क्रोध से स्वस्थ मुकाबला करने के लिए आप सिर्फ एक सवाल पूछें – मुझे इससे क्या नुकसान होगा?

D. उस नुकसान की गंभीरता से डरकर, उस स्थिति को दूर करने के तरीकों की तलाश शुरू कर दें।

E. आपका क्रोध आपके जुनून, साहस और दृढ़-संकल्प को सक्रिय कर सकता है। इसे यूज करें, पॉजिटिव ढंग से।

2) ईर्ष्या (Jealousy)

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हमारे आस-पास के स्टूडेंट्स का बेहतर परफॉर्मेंस देख ‘ईर्ष्या’ उपजने लगती है।

A. अधिक मेहनत करने पर हमें अधिक रिजल्ट्स तुरंत मिलें, ऐसा हर स्टूडेंट (और हर प्रोफेशनल) सोचता ही है, लेकिन दुनिया ऐसे नहीं चलती।

B. तो ईर्ष्या की भावना हममें बनती है, और उस समय हमें पता चलता है कि ‘अच्छा, दुनिया ऐसे काम करती है!’

C. ईर्ष्या से निपटने की कुंजी है – स्थिति का विश्लेषण करना और यह सुनिश्चित करना कि जब आप अपनी तुलना दूसरों से कर रहे हों तो आप ‘सही तुलना’ कर रहे हों।

D. उदाहरण: यदि मध्यम वर्ग में पैदा हुआ कोई व्यक्ति यदि अपनी तुलना अनंत अम्बानी (मुकेश अम्बानी के बेटे) से करने लगे तो वो गलत होगा, लेकिन यदि वही व्यक्ति अपनी तुलना शुरुआती दौर वाले धीरूभाई अम्बानी से करे तो ठीक रहेगा।

E. एक और उदाहरण: एग्जाम तैयारी में अपने बराबर आई.क्यू. और अकादमिक रिजल्ट वाले से कम्पेयर करना ठीक रहेगा, कम से कम शुरुआती दौर में!

3) डर (Fear)

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आपको सुरक्षित रखना आपके दिमाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है, और इसीलिए डर की भावना प्रकृति ने दी है।

A. डर आपको अन्य संभावनाओं की अनदेखी करते हुए, सबसे खराब स्थिति पर प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है।

B. डर फ्लाइट-या-फाइट मोड को ट्रिगर कर देता है।

C. डर कई तरह का हो सकता है जैसे एग्जाम फेल कर जाने का या नौकरी खोने का।

D. लेकिन इसी डर की भावना के कारण आप पॉजिटिव भी हो सकते हैं – अपने पढ़ने का तरीका सुधारते हैं, टीचर से सलाह लेते हैं, पेरेंट्स को सब बताते रहते हैं, आदि।

E. जब आप डरते हैं, तो पूछें, ‘सबसे बुरा क्या हो सकता है?’ फिर विचार करें कि और क्या हो सकता है। और अगर सबसे बुरा हुआ, तो आप आगे क्या करेंगे? फिर डर मन से निकल जाएगा।

4) अपराध बोध ( Guilt)

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यदि हम अपनी एग्जाम तैयारी में कमी की वजह से मन में बहुत बुरा फील करने लगते हैं, तो ये बहुत अच्छी बात है। कैसे? क्योंकि इसका मतलब है- हममें चरित्र है।

A. अपराधबोध एक सकारात्मक, प्रेरक शक्ति हो सकता है।

B. जो लोग अपराध-बोध को एक नकारात्मक भावना के रूप में देखते हैं, वे अक्सर किसी त्रुटि के लिए स्वयं को ‘गिल्टी’ ठहराते हैं।

C. अपराध-बोध की स्वस्थ प्रोसेसिंग में आपकी गलतियों को दोष के रूप में नहीं, बल्कि सुधार और बढ़ने के अवसरों के रूप में देखना शामिल है।

D. अपराध बोध से निपटने में तीन स्टेप हैं: (1) त्रुटि या गलत निर्णय की पहचान करें; (2) वर्तमान में त्रुटि को सुधारें और सुनिश्चित करें कि आप भविष्य में वह त्रुटि नहीं करेंगे; (3) अपनी त्रुटि या गलत निर्णय के परिणामों की जिम्मेदारी लें।

E. इन तीन के बाद, आपका अपराध बोध कम हो जाएगा या पूरी तरह से गायब हो जाएगा।

5) चिंता (Worry)

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चिंता की भावना, एक चेतावनी संकेत है जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। चिंता तब होती है जब एक ही समय में कई भावनाएं उत्पन्न होती हैं। यह असामान्य नहीं है।

A. चिंता की तीव्रता प्रत्येक भावना की तीव्रता का योग है।

B. चिंता का उच्च स्तर घबराहट का कारण बन सकता है।

C. चिंता से निपटने के लिए चिंता से युक्त विभिन्न भावनाओं की पहचान करने से शुरुआत करें।

D. ये सोचें की इनको एक एक कर मैं कैसे ख़त्म करूं।

E. दुनिया में हर चीज के अनेकों ऑप्शंस हैं ये याद रखें।

6) निराशा (Depression)

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जब आपको वह नहीं मिलता जो आप अपने काम, लोगों और यहां तक कि खुद से भी उम्मीद करते हैं, तो आप दुखी और निराश महसूस कर सकते हैं। उदाहरण – एग्जाम में रैंक नहीं लग पाया।

A. निराशा से निपटने के एक सवाल करें – क्या ये अंतिम पड़ाव था?

B. फिर खुद से पूछें – क्या मैं अकेला निराश हुआ हूं, या मेरे जैसे अनेकों हैं?

आज का करिअर फंडा है कि अपनी हर नेगेटिव फीलिंग को स्टूडेंट्स तार्किक सवाल पूछ कर धीरे-धीरे पॉजिटिव बना सकते हैं, और एग्जाम तैयारी में फिसलने के बजाय दृढ़ता से हर तीखे मोड़ का सामना कर सकते हैं।

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