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💥Big Breaking 💥MP Nursing College: एमपी में 453 नए नर्सिंग कॉलेज में से 94 किए गए बंद, बाकियों पर भी होगी कार्रवाई, हाईकोर्ट ने मांगा ब्यौरा, विद्यार्थियों को फीस वापस लेने की हिदायत

भोपाल: एमपी में नर्सिंग कॉलेज (mp nursing college updates) सिर्फ डिग्री बांटती हैं, इसे लेकर कई बार सवाल उठे हैं। आए दिन मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबरें आती हैं कि एक फ्लोर और कमरे में नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने ऐसे ही कॉलेजों को लेकर एक पड़ताल की है। पड़ताल के दौरान पांच हजार वर्ग फुट में निर्मित एक दो मंजिला इमारत आगरा-बॉम्बे हाईवे पर दिखा है। इस जगह का नाम सुंदरपुर है। कॉलेज की बिल्डिंग में जाने के लिए गेट नहीं है। जानवरों को रोकने के लिए प्रवेश द्वार पर कांटेदार झाड़ियां हैं। लेकिन यहां कोई छात्र नहीं है।

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MP Nursing College: मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को जबलपुर हाईकोर्ट में 23 अगस्त को बताना होगा कि प्रदेश में मापदंडों को पूरा न करने वाले कितने कॉलेजों को अब तक बंद किया गया है.

Jabalpur High Court on MP Nursing College: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में नियम के खिलाफ चल रहे नर्सिग कॉलेजों के फर्जीवाड़े पर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने फिर सख्ती दिखाई है. गुरुवार को पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के मुताबिक मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल (MP Nursing Council) के रजिस्ट्रार ने शपथ पत्र पर अपना जवाब पेश किया. हाईकोर्ट में पेश किए गए जवाब के मुताबिक साल 2020-21 में खोले गए 94 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता नवीनीकरण आवेदन को निरस्त कर दिया गया है. इसके साथ ही बिना संसाधनों के संचालित हो रहे 149 कॉलेजों का अब तक जवाब नहीं आया है.

शपथ पत्र में दिए गए इस जवाब को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूछा है कि जिनके जवाब नहीं आए हैं, उनको अब तक क्यों नहीं बंद किया गया है? इस पर करवाई के लिए मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने 2 दिनों की मोहलत मांगी है. मामले पर अगली सुनवाई 23 अगस्त को नियत की गई है. अब मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को 23 अगस्त को बताना होगा कि प्रदेश में मापदंडों को पूरा न करने वाले कितने कॉलेजों को अब तक बंद किया गया है.

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने दायर की है जनहित याचिका

आम तौर पर नर्सिंग कॉलेज में छात्रों की भीड़ होती है। यह नर्स बनने के लिए लोग प्रशिक्षण लेते हैं। सरकारी रेकॉर्ड में इसका नाम डीडी स्वामी नर्सिंग कॉलेज है। यह मुरैना में है और इसमें 60 छात्र जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी नर्सिंग डिग्री के लिए अध्ययन कर रहे हैं। भवन के अंदर एक सुनसान कमरा प्रिंसिपल के कमरे के रूप में रखा गया है। महिला वार्ड में खाली अलमारी और गंदगी है। पुरुष वार्ड में अस्पताल के पचास बिस्तर धूल भूरे प्लास्टिक में है, जो मकड़ी के जाल के ढके हुए है। साथ ही हर दूसरे कमरे में ताला लटका हुआ है। बताया जाता है कि यह नर्सिंग कॉलेज सिर्फ पैसे लेकर डिग्रियां बांटता है। यह सरेआम सरकारी नियमों का उल्लंघन है। साथ ही एमपी में खराब स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बयां के करने के लिए काफी है।

एमपी के छह जिलों में एक महीने के अंदर 16 नर्सिंग कॉलेजों की पड़ताल की गई है। इस दौरान यह जानकारी सामने आई है कि कॉलेजों के नाम पर एक समृद्ध व्यवसाय चल रहा है, जो खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। एक ही प्रशिक्षक कई कॉलेजों में एक ही समय में कैसे पढ़ाते हैं।

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चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस डीके पालीवाल की खंडपीठ ने जवाब को रिकॉर्ड पर लेकर अगली सुनवाई 23 अगस्त तक कार्रवाई कर ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि राज्य में नियमों और मापदंडों का पालन किए बिना निजी नर्सिंग कॉलेजों का संचालन हो रहा है. गुरुवार को मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट के निर्देश पर युगलपीठ के समक्ष रजिस्ट्रार नर्सिंग काउंसिल का शपथ पत्र पेश किया.

कॉलेजों के पास उपलब्ध संसाधन और बिल्डिंग आदि के बारे में मांगे गए थे जवाब

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हाईकोर्ट के निर्देश पर दिनांक 10 मई 2022 को मान्यता सम्बंधी खामियों वाले नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी किए गए थे. इसमें इन कॉलेजों के पास उपलब्ध संसाधन, बिल्डिंग आदि के बारे में जवाब मांगा गया था. इनमें से 304 कॉलेजों ने ही जवाब दिए हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है. याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नर्सिंग काउंसिल ने अपने शपथ पत्र में सिर्फ पिछले वर्ष 2020-21 में खुले हुए कॉलेजों का उल्लेख किया गया है, जबकि याचिका के लम्बित रहने के दौरान वर्ष 2021-22 में भी नए अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई है.

453 नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में फर्जीवाड़े का लगा है आरोप

इस पर कोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से यह भी पूछा कि याचिका लंबित रहने के दौरान कितने नए कॉलेजों को मान्यता जारी की गई है, यह भी बताएं. आपको बता दें कि जबलपुर की लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया है कि कई नर्सिंग कॉलेज गाड़ियों के शोरूम और वर्कशॉप में चल रहे हैं. जिनमें न लैब-लाइब्रेरी है और न ही कॉलेज-हॉस्टल की बिल्डिंग है. याचिका में इस फर्जीवाड़े को प्रदेश के हेल्थ सेक्टर से खिलवाड़ बताया गया है.

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मध्यप्रदेश के 93 नर्सिंग कॉलेजों की हुई मान्यता समाप्त

मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसलिंग भोपाल दोबारा प्रदेश की तराना कॉलेजों की 2021-22 की मान्यता समाप्त की गई हैं

छात्रों को सलाह दी जाती है कि यदि इन कॉलेजों में से आपके कोई परिचित अध्ययनरत हैं तो उन तक यह खबर अवश्य पहुंचाएं तथा कालेज से फीस वापस ले लें क्योंकि इन कॉलेजों की डिग्रियों की मान्यता नहीं रहेगी ना ही यह कालेज अब आगे परीक्षा ले पाएंगे।

मान्यता रद्द कॉलेज की सूची देखे

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