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CM को फर्जी नोटशीट भेजने का मामला: स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का पुराना चपरासी और BJP विधायक रामपाल सिंह के कुक रह चुके लोग निकले गैंग सरगना, रामपाल के नाम से 27 सिफारिश भेजी Digital Education Portal

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आरोपी अब तक करीब 30 कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए प्रपोजल भेज चुके थे। - dainik bhaskar

आरोपी अब तक करीब 30 कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए प्रपोजल भेज चुके थे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री निवास पर पहुंची ट्रांसफर की फर्जी नोटशीट मामले में क्राइम ब्रांच ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के यहां चपरासी रह चुका है तो दूसरा सिलवानी (रायसेन) से BJP विधायक रामपाल सिंह का कुक था। ये दोनों मिलकर दो कम्प्यूटर ऑपरेटर से लेटर टाइप कराते थे। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति की मदद से फर्जी डिस्पैच नंबर डालकर कर्मचारी से रुपए खाते में डलवाते थे। चिट्‌ठी और नोटशीट तैयार होने के बाद इसे वल्लभ भवन की आवक-जावक शाखा के बॉक्स में डालकर प्राप्ति रसीद ले लेते थे। कर्मचारियों को शक न हो, इसके लिए आरोपी उन्हें मंत्री-विधायकों के बंगलों के बाहर बुलाकर डील करते थे।

सांसदों और विधायक की फर्जी नोटशीट तैयार कर तबादले कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजने वाले शातिर गिरोह के पांच सदस्यों को बुधवार को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों ने राज्य सरकार के तबादलों से प्रतिबंध हटाते ही लोगों से संपर्क करना श्ाुरू कर दिया था। जो लोग संपर्क में आते उनके तबादलों की फर्जी नोटशीट तैयार कर सीएम कार्यालय भेजना शुरू कर दिया।

इस फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड विधायक रामपाल सिंह का पुराना रसोइया निकला। उसने फर्जी नोटशीट तैयार कराने के लिए दो कंप्यूटर ऑपरेटर रखे थे। क्राइम ब्रांच के अफसरों का कहना है कि अभी विधायक रामपाल सिंह के लेटरहेड पर फर्जी नोटशीट का मामला सुलझा है, सांसदों की नोटशीट तैयार करने वालों की तलाश जारी है।

बता दें कि सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, महेंद्र सिंह सोलंकी, रोडमल नागर और विधायक रामपाल सिंह के नाम से फर्जी नोटशीट तैयार कर तबादले की अनुशंसा कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जा रही थी। इन नोटशीट को मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अफसरों ने जांच में फर्जी बताकर शिकायत क्राइम ब्रांच को थी।

आरोपितों तक ऐसे पहुंची क्राइम ब्रांच

क्राइम ब्रांच ने उन लोगों को बुलाकर पूछताछ शुरू की, जिनकी तबादलों की अनुशंसाएं की गई थीं। इस दौरान दो संदेहियों के नाम सामने आए। इनमें सुनहरी बाग जवाहर चौक भोपाल निवासी 36 वर्षीय रामप्रसाद राही गिरोह का सरगना निकला। वह पूर्व में विधायक रामपाल सिंह के भोपाल स्थित बंगले पर रसोइया था।

उसके अलावा दूसरा संदेही ग्राम कानीबड़ा रायसेन निवासी 35 वर्षीय लखनलाल धाकड़ हैं। इन दोनों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो फर्जी नोटशीट तैयार करना कबूल कर लिया। उन्होंने अपने साथी शिक्षा विभाग के भृत्य रामागोपाल पाराशर (54) निवासी मॉडल स्कूल परिसर टीटीनगर भोपाल, रामकृष्ण राजपूत (31) और दशरथ राजपूत (44) निवासी ग्राम खामा पडवा जिला हरदा के बारे में बताया। इस तरह से आरोपितों की गिरफ्तारी हुई।

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रामगोपाल ने बंगले से चुराया था लेटरहेड

क्राइम ब्रांच के एएसपी गोपाल धाकड़ ने बताया कि रामगोपाल पाराशर शिक्षा विभाग का भृत्य है। वह पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के बंगले पर काम कर चुका है। वह डाक लगाने के लिए कई बार रामपाल सिंह के बंगले पर जाता था तभी उसने विधायक के बंगले से लेटरहेड हेड चुराकर पांच हजार में रामप्रसाद राही को बेच दिया था।

आरोपियों के पास से पुलिस ने विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधियों की खाली नोटशीट, लेडर हेड बरामद किए हैं, जिन्हें आरोपियों ने जनप्रतिनिधियों को बंगले से चोरी किया था। आरोपी अब तक 30 कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए प्रपोजल भेज चुके थे। पुलिस आरोपियों को रिमांड में लेकर पूछताछ कर रही है।

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क्राइम ब्रांच एएसपी गोपाल धाकड़ ने बताया कि हाल में शिकायत प्राप्त हुई थी कि कुछ विधायक, सांसदों के लेटर हेड पर स्थानांतरण के प्रस्ताव सीएमओ वल्लभ भवन में प्राप्त हो रहे हैं। शिकायत की जांच में पाया गया कि सांसद, विधायक के लेडर हेड, नोटशीट फर्जी हैं। पुलिस ने जिन अधिकारियों, कर्मचारियों का प्रपोजल भेजा गया था, उन्हें नोटिस देकर पूछताछ शुरू की। जिससे पूरे मामले का खुलासा हो सका।

गिरफ्तार आरोपी और गोरखधंधे में उनकी भूमिका

  • राम प्रसाद राही: सुनहरी बाग जवाहर चौक का रहने वाला है। जनप्रतिनिधियों के बंगले में वह कुक का काम करता है। वह फर्जी लेटर हेड तैयार करता था। खुद ही विधायक, सांसद के हस्ताक्षर कर प्रपोजल संबंधित विभाग को भेज देता था।
  • लखनलाल: ग्राम कानीबड़ा उपयपुरा, रायसेन का रहने वाला है। फर्जी लेटर हेड में डिस्पेच नंबर अंकित करने का काम करता था। इसके साथ ही ट्रांसफर करवाने वाले से अपने खाते में रकम जमा कराता था।
  • रामकृष्ण राजपूत: टिमरनी, हरदा का रहने वाला है। वह कम्प्यूटर ऑपरेटर है। लेटरहेड में वह ही टाइपिंग करता था। इसके लिए उसे कमीशन मिलता था।
  • दशरथ राजपूत: खामापडवा, हरदा का रहने वाला है। कम्प्यूटर ऑपरेटर है। वह रामकृष्ण के साथ मिलकर नोटशीट में प्रपोजल तैयार करता था।
  • रामगोपाल पाराशर: मॉडल स्कूल परिसर टीटी नगर, भोपाल में रहता है। वह शिक्षा विभाग में सरकारी भृत्य है। लेटरहेड उपलब्ध कराने का काम करता था।

मंत्री चौधरी के बंगले में कर चुका सरगना काम

गिरोह का सरगना रामगोपाल पाराशर है। वह मंत्री प्रभुराम चौधरी के बंगले में काम कर चुका है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि मंत्री के बंगले से ही उसने विधायक रामपाल सिंह का एक खाली लेडर हेड चोरी किया था। इसके अलावा कई अन्य जनप्रतिनिधियों के भी फर्जी लेडर हेड बनाए हैं।

विधायक रामपाल के बंगले में कुक रहा, उनके ही नाम से 27 लोगों की अनुशंशा की

गिरफ्तार आरोपी रामप्रसाद राही की छतरपुर में ससुराल है। उसने विधायक रामपाल सिंह के फर्जी लेडर हेड, नोटशीट से अकेले छतरपुर के रहने वाले 27 कर्मचारियों की अनुशंशा की है। एएसपी धाकड़ ने बताया कि रामप्रसाद ने सबसे अधिक नोटशीट भेजी हैं। वह विधायक रामपाल सिंह के बंगले में कुक रह चुका है।

खुद ही आवक-जावक तक पहुंचाए पत्र

रामप्रसास व रामगोपाल खुद ही फर्जी नोटशीट लेकर वल्लभ भवन की आवक-जावक शाखा तक पहुंचाते थे। इसकी वह रिसीविंग लेकर आते थे। इसके बाद लोगों को आश्वसान देकर रखते थे कि जल्द ही ट्रांसफर हो जाएगा।

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इनके नाम से करते थे फ्रॉड

  • सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर स्टाफ नर्स रानी कुशवाहा का विदिशा से भोपाल ट्रांसफर की अनुशंसा की गई।
  • देवास सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के नाम पर प्रभारी तहसीलदार वीरेंद्र कुमार पटेल का सीधी से देवास ट्रांसफर की अनुशंसा की गई।
  • राजगढ़ सांसद रोडमल नागर के नाम पर शाजापुर नायब तहसीलदार पत्नी शासकीय सेवा में बड़वानी को शाजापुर से बड़वानी ट्रांसफर की अनुशंसा की गई।

एएसपी क्राइम ब्रांच गोपाल सिंह धाकड़ के अनुसार थाना क्राइम ब्रांच को शिकायत मिली थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय वल्लभ भवन में कुछ सांसदों व विधायकों के लेटर हेड पर कई ट्रांसफर के प्रस्ताव आ रहे हैं। आवेदन में संलग्न लेटर हेड व नोटशीट पर फर्जी हस्ताक्षर कर शिक्षा विभाग के 27, राजस्व के 2 और चिकित्सा विभाग के 1 अधिकारी व कर्मचारी के ट्रांसफर के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे।

पुलिस ने सुनहरी बाग जवाहर चौक निवासी रामप्रसाद, उदयपुरा निवासी लखनलाल धाकड़, टिमरनी निवासी रामकृष्ण राजपूत, हरदा निवासी दशरथ राजपूत और टीटी नगर निवासी रामगोपाल पाराशर को गिरफ्तार किया है।

सबके अलग-अलग काम… जानिए, किस आरोपी की क्या भूमिका

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आरोपी रामगोपाल पाराशर – शिक्षा विभाग में भृत्य, इसका काम इन लोगों के लिए लेटर हेड की कॉपी उपलब्ध कराना था।

आरोपी ने कबूला -विधायक रामपाल सिंह के बंगले पर करता था काम…
रामप्रसाद राही उर्फ गुप्ता जी ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह पूर्व में विधायक रामपाल सिंह के बंगले पर प्राइवेट कुक के तौर पर काम करता था। वह पूर्व में मंत्री प्रभुराम चौधरी के बंगले पर भी काम कर चुका है। रामपाल सिंह के बंगले पर लखन लाल और रामगोपाल का आना-जाना था। तीनों की बंगले पर ही दोस्ती हुई व उसके बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े लेटर जारी करने लगे। आरोपियों ने अब तक कितने ट्रांसफर करवाए, खुलासा जांच के बाद होगा।

फोटो काॅपी 5 हजार में देता
रामप्रसाद व लखनलाल ने बताया कि रामगोपाल पाराशर 20 मई तक मंत्री प्रभुराम चौधरी के यहां काम करता था। उसने रामपाल सिंह के नाम के लेटर हेड व नोटशीट की फोटो काॅपी 5 हजार में उपलब्ध कराई थीं। इसकी हूबहू लेटर हेड और नोटशीट फोटो काॅपी की दुकान चलाने वाले परिचित रामकृष्ण राजपूत एवं दशरथ राजपूत से तैयार कराना स्वीकार किया है।

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