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शिक्षण सहायक सामग्री |Teaching Learning Material (TLM) in Hindi, टी एल एम के प्रकार एवं विशेषताएं

बच्चो को हिंदी सिखाने के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री की जरुरत होती है | बच्चो के शिक्षा में Teaching Learning Materials का प्रयोग किया जाए तो बच्चे सरल तरीका से सिख सकते हैं | आज भी सभी सरकारी विद्यालय में टी एल एम का बेहतर प्रदर्शन किया जाता हैं |

शिक्षण सहायक सामग्री Teaching Learning Material (TLM) शिक्षक का वह साधन हैं, जिसके माध्यम से वह अपनी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाता हैं। यह अधिगम प्रक्रिया (learning process) को स्थायी एवं रोचक बनाने का कार्य करता हैं।

TLM के अंतर्गत छात्रों को चित्र,ग्लोब,चार्ट,मॉडल आदि के माध्यम से प्रत्यय (Topic) को समझाने का कार्य किया जाता हैं। जिससे अधिगम-प्रक्रिया में छात्र अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। शिक्षण सहायक सामग्री को TLM एवं Teaching Aids के नाम से भी जाना जाता हैं। यह शिक्षण को प्रभावशाली बनाने का एक उत्तम साधन हैं।

शिक्षण के क्षेत्र में अधिगम करने में सहायक तत्वों को ही सामान्य शब्दों में शिक्षण सहायक सामग्री (Teaching aids) कहते हैं। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानिंगे की शिक्षण सहायक सामग्री क्या हैं? What is Teaching Learning Material (What is TLM)

शिक्षण सहायक सामग्री |Teaching Learning Material (TLM)

Teaching learning material kya hai

यह शिक्षण प्रक्रिया का एक भाग है, जिसका उपयोग छात्रों को प्रकरण को समझाने के लिए किया जाता हैं। इसमें अनेकों श्रव्य सामग्री,दृश्य सामग्री एवं श्रव्य-दृश्य सामग्रियों के माध्यम से शिक्षा को प्रभावशाली बनाया जाता हैं जो इस प्रकार हैं-

1. श्रव्य सामग्री (Audio aids)- यह वह सामग्री होती हैं, जिसके माध्यम से छात्रों को सुनाकर ज्ञान प्रदान किया जाता हैं.

ऐसी सामग्री जिसकी माध्यम से व्यक्ति सुनकर सीखता है उसे श्रव्य सामग्री कहतें हैं |
जैसे – रेडियो , औडियो , टेलीफ़ोन इत्यादि

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● रेडियो (Radio) – रेडियो के माध्यम से छात्रों के ध्यान को एकाग्रचित्त किया जाता हैं, जिससे उनकी अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाया जाता हैं। यह वह यंत्र हैं, जिसके माध्यम से छात्रों को ऐसे लोगो की आत्मकथा एवं भाषण सुनाए जाते हैं। जो उनके जीवन में बदलाव लाने का कार्य करते हैं। यह छात्रों के व्यक्तित्व एवं उनके चरित्र निर्माण हेतु महत्वपूर्ण होता हैं। यह सूचनाओं के प्रसारण का एक उत्तम मार्ग हैं, जिसका उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जाता हैं।

● रेडियो (radio) – रेडियो के माध्यम से छात्रों के ध्यान को एकाग्रचित्त किया जाता हैं, जिससे उनकी अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाया जाता हैं। यह वह यंत्र हैं, जिसके माध्यम से छात्रों को ऐसे लोगो की आत्मकथा एवं भाषण सुनाए जाते हैं। जो उनके जीवन में बदलाव लाने का कार्य करते हैं। यह छात्रों के व्यक्तित्व एवं उनके चरित्र निर्माण हेतु महत्वपूर्ण होता हैं। यह सूचनाओं के प्रसारण का एक उत्तम मार्ग हैं, जिसका उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जाता हैं।
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● टेप रिकॉर्डर (Tape Recorder) – टेप रिकॉर्डर के माध्यम से संचित की गई आवाजों का प्रसारण केसीटो के माध्यम से आवश्यकता अनुसार किया जाता हैं। इसके माध्यम से छात्रों को किसी प्रकरण को स्पष्ट करने एवं शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव लाने हेतु किया जाता हैं। जिससे कक्षा में छात्रों को सक्रिय कर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाया जा सकें।

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2. दृश्य सामग्री ( Visual aids) – इस प्रकार की सामग्रियों के माध्यम से छात्रों को दिखाकर शिक्षा प्रदान की जाती हैं। इसमे प्रकरण से संबंधित वस्तुओं को छात्र के सम्मुख रख शिक्षण प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता हैं। जिसकी सहायता से शिक्षण को रुचिकर बनाने का प्रयास किया जाता हैं। जैसे- ग्लोब,चार्ट,श्यामपट्ट, मानचित्र,मॉडल, फ्लेनल बोर्ड,बुलेटिन बोर्ड,पॉवरपॉइंट।

2. दृश्य सामग्री ( visual aids) – इस प्रकार की सामग्रियों के माध्यम से छात्रों को दिखाकर शिक्षा प्रदान की जाती हैं। इसमे प्रकरण से संबंधित वस्तुओं को छात्र के सम्मुख रख शिक्षण प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता हैं। जिसकी सहायता से शिक्षण को रुचिकर बनाने का प्रयास किया जाता हैं। जैसे- ग्लोब,चार्ट,श्यामपट्ट, मानचित्र,मॉडल, फ्लेनल बोर्ड,बुलेटिन बोर्ड,पॉवरपॉइंट।
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● ग्लोब (Globe) – ग्लोब शिक्षण में व्याख्यान प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण साधन हैं, जिसका उपयोग छात्रों को दिशाओं एवं स्थान का ज्ञान करवाने हेतु किया जाता हैं। इसका अधिक उपयोग भूगोल की कक्षाओं हेतु किया जाता हैं। यह शिक्षण सहायक सामग्री (Teaching aids) का एक महत्वपुर्ण भाग हैं।

● चार्ट (Chart) – चार्ट का उपयोग शिक्षण को रुचिकर एवं सरल बनाने के लिए किया जाता हैं। इसके माध्यम से किसी जटिल प्रकरण को सरल बनाने के लिए किया जाता हैं। इसमें प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु का चित्र,डायग्राम आदि बनाकर प्रकरण को समझाया जाता हैं। यह छात्रों को कक्षा में सक्रिय एवं अनुशासित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

● श्यामपट्ट (Blackboard) – श्यामपट्ट एक महत्वपूर्ण एवं सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली सहायक सामग्री हैं। जिसका उपयोग प्रत्येक कक्षा के छात्रों हेतु किया जाता हैं। इसके माध्यम से कठिन प्रश्नों के उत्तर एवं प्रकरण संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को शायमपट्ट पर लिख दिया जाता हैं। जिससे छात्र कक्षा में सक्रिय तो रहते ही हैं और साथ ही साथ कक्षा में रुचि भी लेते हैं।

● मानचित्र (Map) – मानचित्र के द्वारा छात्रों को नदियों की दिशाओं एवं धरातल की स्थिति या देशों के स्थित स्थान के बारे के जानकारी प्रदान की जाती हैं। जिस कारण छात्र प्रकरण को अमूर्त से मूर्त रूप प्रदान कर दार्शनिक शिक्षा की ओर अग्रसर होते हैं।

मॉडल (Model) – मॉडल का सर्वाधिक उपयोग विज्ञान, भूगोल एवं पर्यावरण संबंधित प्रकरणों को समझाने हेतु किया जाता हैं। इसके अंतर्गत प्रकरण के महत्वपूर्ण बिंदु का चयन कर उसमें प्लास्टिक,कागज,गत्ता, रबर आदि का उपयोग कर उसके जैसा दिखने वाला रूप प्रदान करा जाता हैं। जिससे छात्रों की चिंतन शक्ति का विकास होता हैं और वह कक्षा में उत्तम एवं स्थायी अधिगम कर पाते हैं।

● फ्लेनल बोर्ड (Flannel Board) – फ्लेनल बोर्ड का निर्माण एक कपड़े से किया जाता हैं, जिसका आकर दिखने में लगभग शायमपट्ट जैसा ही होता हैं। जिसमें अनेक छोटी-छोटी वस्तुओं को उस कपड़े में चिपकाकर कक्षा को रुचिपूर्ण बनाया जाता हैं। फ्लेनल बोर्ड का अत्यधिक उपयोग छोटी कक्षाओं हेतु कर छात्रों का संज्ञानात्मक विकास किया जाता हैं।

● बुलेटिन बोर्ड (Bulletin Board) – इस बोर्ड का उपयोग छात्रों को सूचना प्रदान करने हेतु किया जाता हैं। इसमें महत्वपुर्ण सूचनाओं को चस्पा कर एवं महत्वपूर्ण सूचनाओं को अंकित कर छात्रों के ज्ञान में वृद्धि व सूचना प्रदान करने का कार्य करता हैं।

● पॉवरपॉइंट (PowerPoint) – पॉवरपॉइंट आधुनिक युग का नवीन उपयोग हैं, जिसमें स्लाइडर का उपयोग कर छात्रों को नवीन मार्ग से शिक्षण प्रक्रिया हेतु बाध्य किया जाता हैं। यह छात्रों को एकाग्रचित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

3. श्रव्य-दृश्य सामग्री (Audio Visual aids) – इस प्रकार की सामग्रियों के साधन के रूप में ऐसी वस्तुओं का उपयोग किया जाता हैं। जिसके माध्यम से छात्रों को आवाज के साथ-साथ दृश्य दिखाकर शिक्षण कें उद्देश्यो की पूर्ति की जाती हैं। जैसे- टी.वी,दूरदर्शन,नाटक

● टी.वी (TV) – टी.वी आधुनिक शैक्षिक प्रक्रिया का वह भाग हैं, जो छात्रों का सर्वांगीण विकास करने में सहायक हैं। टेलीविजन के माध्यम से छात्रों को प्रेरणा देने वाले भाषणों एवं वैश्विक सूचनाओं से अवगत होने के अवसर प्राप्त होते हैं।

● दूरदर्शन (Doordarshan) – दूरदर्शन के माध्यम से अनेकों शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता हैं। जिसके माध्यम से छात्र घर बैठे अधिगम प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। दूरदर्शन चैनल के माध्यम से छात्रों का भावात्मक,नैतिक,चारित्रिक एवं ज्ञानात्मक विकास किया जाता हैं।

● नाटक (Drama) – नाटक सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के अंतर्गत आने वाला वह भाग हैं, जिसके माध्यम से छात्रों को शैक्षिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर नवीन तरीको से ज्ञान प्राप्त करवाया जाता हैं। इसमें प्रकरण से संबंधित पात्रों का निर्माण कर प्रकरण के आधार पर नाट्य करवाया जाता हैं।

जो उस प्रकरण के महत्वपुर्ण बिंदुओं को स्मरण रखने में सहायता प्रदान करता हैं और यह छात्रों का भावात्मक एवं कल्पनात्मक विकास करता हैं।

शिक्षण सहायक सामग्री की विशेषता |Characteristic of Teaching Learning Material (Teaching aids)

1. यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाता हैं।

2. यह कक्षा में अधिगम संबंधित वातावरण का निर्माण करता हैं।

3. TLM कक्षा में छात्रों को सक्रिय एवं अनुशासित रखता हैं।

4. इनके माध्यम से जटिल प्रकरणों को सरलता से समझाया जा सकता हैं।

5. यह कक्षा में उत्साहपूर्ण एवं रुचिपूर्ण वातावरण का निर्माण करता हैं।

6. शिक्षण सहायक सामग्री (teaching learning material) की सहायता से शिक्षक अपनी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को स्थायित्व प्रदान करता हैं।

7. यह शिक्षण प्रक्रिया को अमूर्त से मूर्त रूप प्रदान करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग हैं।

8. यह समस्त IQ Level वाले छात्रों हेतु लाभदायक होती हैं।

9. इसके माध्यम से छात्रों को कम समय मे अधिक ज्ञान दिया जा सकता हैं।

10. यह कक्षा में अध्यापक को सक्रिय रखने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

शिक्षण सहायक सामग्री की उपयोगिता |Importance of Teaching Learning Material (TLM)

शिक्षा के क्षेत्र में यह एक उत्तम मार्ग हैं, जिसके द्वारा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को स्थायित्व प्रदान किया जा सकता हैं। यह छात्रों की स्मरण शक्ति का विकास करता हैं। इसके माध्यम से ऐसे प्रकरणों को आसानी में समझाया जा सकता हैं, जो अत्यंत जटिल एवं उलझाऊ हैं।

यह सामग्रियों ऐसे छात्रों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होते हैं, जिनका पढ़ाई में मन नही लगता या फिर ऐसे छात्र जिनका बुद्धि स्तर बहुत निम्न हैं। यह कक्षा में ऐसे छात्रों को सक्रिय एवं अनुशासित रखने का कार्य करता हैं, जो कक्षा में अनुशासनहीनता का वातावरण निर्माण करने का कार्य करते हैं।

इस प्रकिया को क्रियान्वयन के समय अध्यापक सक्रिय रहता हैं। जिससे अधिगम प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती हैं और कक्षा में बैठा प्रत्येक छात्र उसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभाता हैं। यह अध्यापक को शिक्षण कार्यों के प्रति संतुष्टि प्रदान करने का कार्य करती हैं।

संक्षेप में |Conclusion

शिक्षण सहायक सामग्री अध्यापक का वह साधन हैं, जिसके माध्यम से वह अपने शिक्षण कार्य को रूचिपूर्ण एवं स्मरणीय बनाता हैं। यह शिक्षण प्रकिया को प्रभावशाली बनाने का उत्तम मार्ग हैं। इसकी सहायता से कठिन प्रकरणों को सरलता से समझाया जा सकता हैं।

दोस्तों आज इस पोस्ट के माध्यम से शिक्षण सहायक सामग्री (Teaching Learning Material in Hindi) को जाना। अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने अन्य दोस्तों के साथ भी अवश्य शेयर करें।

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