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MP News : पुरानी पेंशन बहाली वरिष्ठता सहित अनेक मांगों को लेकर दस हजार शिक्षकों ने किया धरना-प्रदर्शन Digital Education Portal

MP News : आंबेडकर पार्क में हजारों की संख्या में भोपाल पहुंचे असंतुष्ट शिक्षक, संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने सरकार के अड़ियल रवैये को निशाना बनाते हुए मांग पूरी होने तक के लिए लंबे आंदोलन की घोषणा की।

MP News : पुरानी पेंशन बहाली, वरिष्ठता सहित अनेक मांगों को लेकर दस हजार शिक्षकों ने किया धरना-प्रदर्शन
MP News: भाेपाल । राज्य शिक्षक संघ के आह्वान पर राजधानी के आंबेडकर पार्क में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। इसमें महिला शिक्षिका भी शामिल हुई। संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने सरकार के अड़ियल रवैये को निशाना बनाते हुए मांग पूरी होने तक के लिए लंबे आंदोलन की घोषणा की। शिक्षकों ने अनवरत चलने वाले आंदोलन के क्रम में नए वर्ष में जनवरी माह में देश की राजधानी दिल्ली में धरने की चेतावनी भी शिक्षकों ने दी। संघ की मांग है कि सरकारी नौकरी का वजूद पुरानी पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद जीवन जीने का एकमात्र सहारा पेंशन है, जिसे सरकार ने 2005 के बाद के कर्मचारियों को देना बंद कर दिया है। उसी की जस की तस बहाली और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता सहित 15 सूत्रीय मांगों को लेकर रविवार को भोपाल के अांबेडकर पार्क में प्रदेश भर के शिक्षकों ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने मांगे पूरी होने तक अनवरत आंदोलन की घोषणा की। घोषित आंदोलन में आगामी 13 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रदेश के जिलों में पेंशन सत्याग्रह न्याय यात्रा निकाली जाएगी। इसी दौरान 16 अक्टूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को जिला एवं ब्लाक स्तर पर राजनात्मक कार्यक्रम आयोजित कर जन समर्थन जुटाया जाएगा। एक दिसंबर से 24 दिसंबर तक भोपाल में प्रदेश के दो-दो जिले आकर लगातार 25 दिनों तक धरनारत रहेंगे। इसके बाद भी सरकार नही मानी तो नए वर्ष में जनवरी के माह में राजधानी दिल्ली में विशाल रैली निकाली जाएगी।

कम पेंशन में घर चलाना मुश्किल

संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने वर्तमान में चल रही नई पेंशन नीति को कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि जबलपुर जिले के एक शिक्षक द्वारका परौहा को 20 वर्ष 6 माह की नौकरी के बाद मात्र 1119 रुपये पेंशन मिल रही है। इतनी लंबी सेवा के बाद जब 62 वर्ष के हुए तो ऐसी स्थिति बनाने वाली सरकार बताए कि इतने पैसों में जीवन कैसे जिया जाए। प्रांताध्यक्ष ने आह्वान किया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रीगण 1119 रुपये में महीना गुजार के दिखाएं । संघ ने मांग की कि सरकार नई पेंशन नीति को बंद कर पुरानी पेंशन नीति को बहाल करें।

प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दी जाए

अध्यापक संवर्ग को जुलाई 2018 से राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्त किया गया है, लेकिन इस नवीन गठन में वरिष्ठता के निर्धारण में पुरानी सेवाओ की गणना को लेकर अनिश्चितता चार साल से जस की तस है। संघ ने चेतावनी दी कि सेवाओं की गणना में पूर्व की समस्त सेवाओ को शामिल करना होगा। सरकार अपने वादे के मुताबिक प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता के आदेश तुरंत जारी करे। जिससे विगत 2-3 वर्षों से लंबित क्रमोन्नति के आदेश जारी हो सकें।

पदोन्नति दी जाए

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राज्य में न्यायालय के नाम पर अनावश्यक रूप से पदोन्नति का लाभ नही दिया जा रहा है। सरकार स्तर पर इसका हल निकालने गठित कमेटी सिर्फ बैठकें कर रही है। सरकार में इच्छा शक्ति की कमी के चलते पदोन्नति और क्रमोन्नति जैसे जायज विषयों पर भी कर्मचारियों को आंदोलन करना पड़ रहा है। सरकार पदोन्नति का हल निकालें और जिन्हें पदोन्नत नहीं कर पा रही उन्हें उच्च पदनाम का लाभ दिया जाए।

ग्रेज्युटी का लाभ ही नही मिल रहा है

वित्त विभाग द्वारा शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति और मृत्यु पर ग्रेज्युटी का लाभ दिए जाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन एक भी सेवा में मृत राज्य शिक्षा सेवा के शिक्षक को ग्रेज्युटी का लाभ प्रदान नही किया गया। आवेदन देने पर सेवा में नियुक्ति की तिथि 01.07.2018 बताकर लिखित रूप में आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।

अनुकंपा नियुक्ति पर शर्ते अमानवीय

शासकीय कर्मचारी की मृत्यु पर आश्रित को अनुकंपा जैसे मानवीय पक्ष में तमाम शर्ते जोड़ना अमानवीय है।शिक्षक की मृत्यु पर आश्रित के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के साथ डी एड/बी एड और शिक्षक पात्रता परीक्षा की बाध्यता न्यायसंगत नही है। इसी तरह विभाग ने प्रयोगशाला शिक्षक के पद पर अनुकंपा का रास्ता तो निकाला पर दिनांक 01.02.2021 को जारी आदेश अगले दो माह बाद ही अधिकारियों द्वारा रोक दिया गया। सरकार इन जटिलताओं को दूर कर आगामी 30 दिनों में एक विशेष अभियान चलाकर मृतक सभी शिक्षकों और अध्यापकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करे।

तीन वर्ष की परीवीक्षा और पूर्ण वेतन न देना गलत

सरकार द्वारा नवनियुक्त शिक्षकों को तीन वर्ष परीवीक्षा और वर्षवार वेतन दिया जा रहा है। जब नियुक्त शिक्षक पहले से दो वर्ष से अधिक डी एड/बी एड करने में गुजार चुका है तो उसे पूर्ण काम का पूर्ण वेतन नियुक्ति तिथि से ही मिलना चाहिए। इसी तरह तीन वर्ष की परीवीक्षा एक बहुत लंबी अवधि है इसे घटाकर दो वर्ष किया जाए।

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