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💥Big Breaking 💥 अब मध्य प्रदेश में प्री-नर्सरी और केजी स्कूल चलाने के लिए लेनी होगी मान्यता Digital Education Portal

तीन से छह साल के बच्चों को प्राइमरी स्कूल के लिए तैयार करेगी सरकार। सरकार ने लागू की शाला पूर्व शिक्षा नीति-2022।

अब मध्‍य प्रदेश में प्री-नर्सरी और केजी स्कूल चलाने के लिए लेनी होगी मान्यता

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में अब प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी कक्षाएं संचालित करने के लिए मान्यता लेनी जरूरी होगी। राज्य सरकार ने ‘शाला पूर्व शिक्षा नीति-2022″ लागू कर दी है। अब बगैर मान्यता ये केंद्र चलते पाए गए, तो संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में नजदीक के तीन से छह साल के बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा दी जाएगी।

मध्य प्रदेश में अब प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी कक्षाएं संचालित करने के लिए मान्यता लेनी जरूरी होगी। राज्य सरकार ने 'शाला पूर्व शिक्षा नीति-2022
Pre Primary Play School Manyata
इसका उद्देश्य बच्चों को पहली कक्षा के लिए बुनियादी तौर पर तैयार करना है। इन्हें बाल संस्कार केंद्र, शिशु विकास केंद्र या नर्सरी केंद्र के नाम से संचालित किया जाएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में अतिरिक्त कक्ष बनाए जाएंगे, जिन्हें स्कूल की कक्षा की तरह डिजाइन किया जाएगा। पढ़ाने के लिए शिक्षक रखे जाएंगे और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रश्ािक्षण दिलाया जाएगा। सरकार करीब पांच साल से नीति तैयार कर रही थी, जो अब लागू की गई है।

किसी भी स्कूल में पहली कक्षा में बच्चे को छह साल की उम्र में प्रवेश दिया जाता है। निजी स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चों को प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी पढ़ाकर पहली कक्षा के लिए तैयार किया जाता है। जबकि, सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले पहले से तैयार नहीं होते, जिससे इनकी बुनियाद कमजोर रह जाती है। शाला पूर्व शिक्षा नीति इसी खाली स्थान को भरेगी। तीन से छह साल के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में ही तीन से चार घंटे स्कूल के माहौल में रखा जाएगा। उनके लिए अलग से पाठ्यक्रम तैयार होगा और जरूरी सुविधाएं (शौचालय, अतिरिक्त कक्ष, पानी-बिजली) की व्यवस्था भी जुटाई जाएगी। एक कक्ष ऐसा भी रहेगा, जिसमें उन्हें सुविधाजनक तरीके से सुलाया जा सके।

जिला कार्यक्रम अधिकारी देंगे मान्यता

नई व्यवस्था में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्री-नर्सरी, केजी, किंडर गार्टन स्कूलों को मान्यता देंगे। विभाग ने इन अधिकारियों को नोडल बनाया है। ये ही औचक निरीक्षण और कार्रवाई भी करेंगे।

जागरूकता शिविर लगेंगे

बच्चों के साथ घर में होने वाले व्यवहार और उससे बच्चे की मनोवैज्ञानिक जरूरत को समझने के लिए जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें मनोविशेषज्ञ रहेंगे।

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इन पर लागू होंगे नियम

आंगनबाड़ी केंद्र, शिशुगृह, प्ले स्कूल, शाला पूर्व शिक्षा केंद्र, नर्सरी स्कूल, किंडर गार्टन, प्रारंभिक स्कूल, बालबाड़ी और गृह आधारित देखरेख केंद्रों पर इस नीति के नियम लागू होंगे। इस अवधारणा में देखभाल, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा का समावेश रहेगा।

बच्चों को यह सिखाया जाएगा

यह अनौपचारिक शिक्षा रहेगी। बहुआयामी एवं बहुस्तरीय गतिविधियों के तहत खेल, खोज आधारित शिक्षा (अक्षर ज्ञान, भाषा, संख्या, गिनती, रंग, आकार, इंडोर-आउटडोर खेल, पहेलियां और तार्किक सोच, समस्या सुलझाने की कला, चित्रकला, पेंटिंग, अन्य दृश्य कला, शिल्प, नाटक, कठपुतली, संगीत सहित अन्य) को शामिल किया है। इसमें सामाजिक कार्य, मानवीय संवेदना, अच्छे व्यवहार, शिष्टाचार, नैतिकता, व्यक्तिगत स्वच्छता, समूह में कार्य करना और आपसी सहयोग को विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

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प्रदेश में 72 हजार से ज्यादा प्ले स्कूल

प्रदेश में 72 हजार से ज्यादा प्ले स्कूल (प्री-नर्सरी, केजी, किंडन गार्टन) संचालित हैं, जिन्हें अभी किसी भी मान्यता की जरूरत नहीं होती है।

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