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Income tax Return Form Number 16 शासकीय सेवक कैसे बचे अधिक आयकर से, अध्यापकों को एरियर मिलने से बढ़ेगी आय कैसे बचे पेनल्टी से , जाने इनकम टैक्स भरने की पूरी प्रक्रिया एवं आवश्यक प्रपत्र डाउनलोड करें

Income tax Return Form Number 16 शासकीय सेवक आयकर गणना प्रपत्र कैसे बच्चे अधिक इनकम टैक्स से जाने इनकम टैक्स भरने की पूरी प्रक्रिया एवं आवश्यक प्रपत्र डाउनलोड करें

Income tax form number 16 शासकीय सेवक कैसे बचे अधिक आयकर से, अध्यापकों को एरियर मिलने से बढ़ेगी आय कैसे बचे पेनल्टी  से , जाने इनकम टैक्स भरने की पूरी प्रक्रिया एवं आवश्यक प्रपत्र डाउनलोड करें
Income Tax Return

इनकम टैक्स नहीं भरने पर भी दाखिल करना चाहिए इनकम टैक्स रिटर्न

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आयकर केन्द्रीय सरकार द्वारा करदाता की वित्तीय वर्ष के कुल आय पर निर्धारित दरों से लगाया जाता है । यदि करदाता की वित्तीय वर्ष के दौरान कुल आय आयकर छुट की निर्धारित सीमा अर्थात् रु. 2,50,000/- से अधिक हो तो उन्हें निर्धारित देय तिथि 31 जुलाई 2021 के पूर्व निर्धारित प्रारूप में आयकर विवरणी जमा करना अनिवार्य है भले ही उन्होंने कोई आयकर नहीं पटाया हो । अथवा नियोक्ता द्वारा उनका टी.डी.एस. (T.D.S ) काट लिया गया हो. अन्यथा आयकर अधिनियम के अधीन आयकर विभाग द्वारा पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है। कर्मचारियों से देय आयकर की कटौती खातों पर ही किये जाने का प्रावधान है, जिसके लिये वेतन आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) का दायित्व होता है कि वे अपने अधीन कर्मचारियों के वेतन से देय उचित आयकर की राशि कटौती कर शेष वेतन का भुगतान करें तथा आयकर की काटी गई राशि तुरन्त सरकारी खजाने में जमा करायें।

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प्रायः यह देखा गया है कि फरवरी माह में कर्मधारीगण अपने आयकर का आकलन करते हैं जिससे आयकर के भुगतान का भार एक ही माह में पड़ जाता है । इन परेशानियों से बचने के लिये उन्हें वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से ही अनुमानित आयकर का स्वयं आकलन करना चाहिये ताकि आयकर के भार से बचने के लिये समय-समय पर विभिन्न योजनाओं में निवेश करते रहें । जिससे आयकर का भार एवं निवेश का भार एक साथ न आये।

शासकीय सेवक ऐसे बचे अधिक इनकम टैक्स से Income tax Return

कर्मचारियों के नये वेतनमान लागू होने पर पिछले वर्षों का एरियर्स मिलने से उस वर्ष की कर योग्य आय बढ़ जाती है जिससे आयकर की गणना अधिक आती है। अतः आयकर की अधिक देयता से बचने के लिये शासन ने कर्मचारियों को विकल्प दिया है कि वे चाहें तो संबंधित वर्ष से लागू आयकर की दर से इस वर्ष प्राप्त बकाया राशि पर आयकर दे सकते हैं। इस प्रकार कर में धारा 89(0 के तहत राहत (Relief) प्राप्त की जा सकती है।

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मानक कटौती Income tax Return

मानक कटौती :- धारा 16 के अंतर्गत वेतन भोगियों को रु. 50000/- या प्राप्त देतन की राशि जो भी कम हो मानक कटौती के रूप में वित्तीय वर्ष 2020-21 से स्वीकृत होगी । (अधिकतम सीमा स. 50000/-) (ब) रु. 5,00,000/- लाख तक कुल कर योग्य आय वाले व्यक्तियों को रु. 12500/- की छूट (धारा 87A) :- ऐसे निवासी करदाता व्यक्ति जिनकी कुल कर योग्य आय रु. 5.00,000/- (पांच लाख रूपये तक) है, उन्हें वित्तीय वर्ष 2020-2021 में रु. 12500/- या वास्तविक देय आयकर की राशि जो कम हो, की छूट धारा 87A के तहत मिलेगी।

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सर चार्ज पेनल्टी

सरचार्ज :- व्यक्तियों HUF, AOP, BOI सहकारी समिति, फर्म आदि के मामले में यदि कुल आय 50 लाख से ज्यादा तथा 1 करोड़ से कम हो तो 10% अधिभार लगेगा । यदि कुल आय 1 करोड़ अधिक य 2 करोड़ तक हो तो 15% अधिभार लगेगा, यदि आय 2 करोड़ से अधिक व 5 करोड़ तक हो तो 25% अधिभार लगेगा तथा यदि आय 5 करोड़ या उससे अधिक होने पर 37% अधिभार लगेगा। (वित्तीय वर्ष 2020-21 से लागू)

स्वास्थ्य और शिक्षा अधिकार Income tax Return

स्वास्थ्य और शिक्षा अधिकार :- वित्तीय वर्ष 2018-19 से स्वास्थ्य और शिक्षा अधिभार कुल आयकर पर 4% की दर से देय होगा।

3. अति सीनियर सिटीजन (जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक हो) उन्हें आयकर गणना के लिए रु. 5,00,000/- तक आयकर निरंक होगा। 4. स्वयं के मकान निर्माण हेतु लिए गये ऋण हेतु देय व्याज की राशि में छूट की अधिकतम सीमा रु. 2,00,000/- है धारा 24(1 ) 5, धारा 80C के अंतर्गत निवेश कर, कर के भार से बचे : (अधिकतम सीमा रु. 1,50,000/-) GPF, GIS, PPE, ELSS सुकन्या समृद्धि खाते आदि में निवेश की गई राशि पर 100% छूट के योग्य होगी ।

ii, भारतीय जीवन बीमा प्रीमियम एवं अन्य जीवन पॉलिसियों में निवेश की मई राशि 100% छूट के योग्य होगी ।

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iii. जीवन बीमा पॉलिसी प्रीमियम :-1-4-2013 को या उसके बाद जारी पॉलिसी पर जीवन बीमा प्रीमियम, यदि बीमित व्यक्ति किसी विकलांगता रो (धारा 80U) या किसी रोग से (धारा 80 DDB) पीडित हो, बीमा राशि के 15% तक कटौती योग्य होगा जबकि सामान्य व्यक्ति के लिए जारी पॉलिसी पर बीमा प्रीमियम राशि 10% तक की सीमा में ही कटौती के योग्य है।

iv. राष्ट्रीय बचत पत्र में निवेश की गई राशि पर 100% छूट के योग्य होगी v. दो बच्चों की ट्यूशन फीस की रसीद प्रस्तुत करने पर 100% छूट के योग्य होगी।

vi. गृह ऋण वापसी पर (प्रमाण प्रस्तुत करने पर) मूलधन का 100% छूट के योग्य होगी । vii. बैंक में पाँच वर्षों के लिए स्थायी जमा (एफ.डी.आर.) करने पर 100% छूट के योग्य होगी। किन्तु इसे पांच वर्षों के पूर्व निकालने पर कर योग्य होगी एवं एफ.डी.आर. पर मिलने वाला व्याज कर योग्य होगा।

vi.भारतीय जीवन बीमा या अन्य पेंशन योजना में जमा की गई प्रीमियम राशि पर 100% छूट के योग्य होगी। in, उपरोक्त के अतिरिक्त वे सभी निवेश जो पूर्व में धारा 88 के अंतर्गत स्वीकृत थे वे 80C के निवेश में शामिल होंगे।

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X. डाकघर मियादी जमा नियम, 1981 के अंतर्गत किसी खाते में 5 वर्षों की मियादी जमा एवं वरिष्ठ नागरिक जमा योजना नियम 2004 के अंतर्गत किसी खाते में जमा । (यदि जमा तिथि से 5 वर्ष पूर्व कोई राशि निकाली जाती है तो वह उस गत वर्ष की आय मानी जायेगी।)

xi. धारा 80C – केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम (न्यूनतम 3 वर्ष के लिए)

8. स्वयं एवं स्वयं की पत्नी आश्रित माता-पिता और बच्चों के स्वास्थ्य पर चिकित्सा बीमा प्रीमियम अधिकतम रू. 25,000/- यदि बीमित व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक हो तो रु. 50,000/- छूट प्रदान की जायेगी। (धारा 80p)

यदि कोई करदाता अपने माता-पिता के लिए कोई स्थास्थ्य बीमा प्रीमियम का भुगतान करता है तो भुगतान के लिए राशि स. 25,000/- और यदि माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हो तो रु, 50,000/-की अधिकतम कटौती स्वीकृत होगी। (धाराBOD) आश्रित विकलांग के उपचार या अनुरक्षण पर खर्च के विरुद्द र. 75,000/- की छूट एवं गंभीर विकारलांगता की दशा में 9. रु. 1,25,000/- की छूट प्रदान की जायेगी (धारा BODP) 10. स्वयं या आश्रित के गंभीर बीमार (आयकर बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट) के उपचार हेतु अधिकतम रु. 40,000/- की छूट एवं यदि बीमित व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक हो तो उसे. 1,00,000/- की छूट प्राप्त होगी। (धारा 80DDB) 11. केन्द्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट कोप में दान देने पर दान की राशि के 50% एवं कुछ विशेष दानों पर 100% आय कटौती की जाती है । प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए गये दान पूर्णतः कटौती योग्य है। (धारा 806)

12. शिक्षा ऋण पर ब्याज (धारा 80E) :- शिक्षी ऋण व्याज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर शिक्षा ऋण पर ब्याज की कटौती 100% प्राप्त होगी 13. रिहायशी मकान संपत्ति के लिए स्वीकृत ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80EE/80EEA) :- ऐसे व्यक्ति करदाता जो पहली बार घर खरीद रहे हैं, को अतिरिक्त लाभ देने के उद्देश्य से आयकर अधिनियम के अंतर्गत यह मई धारा जोड़ी गई है और प्रावधान किया गया है कि कोई करदाता, जो व्यक्ति है, को उसकी कुल आय की गणना करते समय इस धारा के प्रावधानों के अनुसार एवं उनके तहत, किसी रिहायशी मकान से अधिग्रहण के उद्देश्य से किसी वित्तीय संस्थान से लिए गए ऋण पर देय व्याज कटौती के रूप में स्वीकृत होगा। आगे यह प्रावधान भी किया गया है कि धारा 80EE के अंतर्गत 1 अप्रैल 2016/धारा 80EEA के अंतर्गत 1 अप्रैल 2019 को प्रारंभ होने वाले कर निर्धारण वर्ष के लिए किसी व्यक्ति करदाता की कुल आय की गणना करते समय इस धारा के अंतर्गत कटौती की राशि ( धारा 80EE में रु. 50,000/- व धारा 80EEA में रु. 1,00,000/- से) अधिक नहीं होगी तथा ऐसी दशा में जहां संबंधित गत वर्ष के लिए देय व्याज की राशि रु. 50,000/- से कम है तो शेष राशि धारा 80EE में 1 अप्रैल 2017 व धारा 80EEA में 1 अप्रैल 2020 से प्रारंभ होने वाले कर निर्धारण वर्ष में कटौती के रूप में स्वीकृत होगी । धारा ৪0EE में (निर्धारण वर्ष 2017-18 से लागू) जबकि धारा 80EEA में (निर्धारण वर्ष 2019-20 से लागू) इन धाराओं के अंतर्गत कटौती की प्रमुख शर्ते निम्नलिखित है :

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(1) वित्तीय संस्थान के द्वारा ऋण की स्वीकृत धारा 80EE में 1 अप्रैल 2016 से प्रारंभ एवं 31 मार्च 2017 को समाप्त जबकि धारा 80EEA में 1 अप्रैल 2020 से प्रारंभ एवं 31 मार्च 2021 को समाप्त समयावधि के दौरान दी गई हो, (2) उक्त रिहायशी मकान संपत्ति के अधिग्रहण के लिए रवीकृत ऋण की राशि घारा 80EE में र. 35,00,000/- से अधिक न हो,जबकि धारा 80EEA में कोई सीमा नहीं है।

उक्त मकान, संपत्ति का मूल्य धारा 80EE में रु, 50,00,000/- व धारा 80EEA में 45,00,000/-से अधिक न हो, (4) ऋण की स्वीकृति के दिन करदाता के पास अन्य कोई रिहायशी मकान संपत्ति न हो (दोनों धाराओं में) इन धाराओं के उद्देश्य वित्तीय संस्थान से आशय एक बैंकिंग कंपनी जिस पर बैंकिंग नियमन अधिनियम 1949, लागू होता हो से है एवं इसमें उस से अधिनियम की धारा 51 के अंतर्गत बताये गये बैंकिंग संस्थान या बैंक अथवा हाऊसिंग फायनेस कंपनी शामिल है। यहां हाऊसिंग फायनेंस कंपनी से आशय ऐसी पब्लिक कंपनी से है जिसका निर्माण या पंजीयन भारत में रिहायशी उद्देश्यों के लिए घर के निर्माण या क्रय के लिए दीर्घावधि वित्त प्रदान करने के व्यवसाय को चलाने के मुख्य उद्देश्य से किया गया हो।

14. FY19-20 से एक नया सेक्शन 80EEB लागू हुआ है जिसके अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद के प्रयोजन के लिए किसी भी वित्तीय संस्था से लिए गए ऋण (जो 1 अप्रैल 2010 1 31 मार्च 2023 के बीच मंजूर हुआ हो) पर देय ब्याज 1.5 लाख रु. की अधिकतम सीमा में कटौती योग्य होगा। (इलेक्ट्रिक वाहन मोटर द्वारा संचालित होती है जिसे पावर की आपूर्ति वाहून में स्थापित बैटरी द्वारा की जाती है)

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15. (1) बचत खाते में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती धारा BOTTA :- बचत खातों से प्राप्त व्याज (बैंक एवं डाकघर) (i) अधिकतम रु. 10,000/- तक की कटौती स्वीकार्य होगी (मियादी खातों की व्याज को छोड़कर) बचत खाते और भियादी खाते में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती धारा 80TTB :- दरिष्ठ नागरिकों को बचत

खातों व मियादी खातों से प्राप्त ध्याज (बैंक एवं डाकघर) अधिकतम रु. 50,000/- तक की कटौती स्वीकार्य होगी। 16. स्थाई विकलांग या दृष्टि दोष निर्धारिती को विकलांगता 40% से अधिक होने पर स. 75,000/- एवं विकलांगता 80% से अधिक होने पर रु. 1,25,000/- की कटौती प्रदान की जायेगी। (धारा 800) 17. 2.50 लाख से अधिक कर योग्य आय वालों को ई-रिटर्न जमा करना अनिवार्य :- ऐसे व्यक्ति या अविभाजित हिन्दू परिवार (HU.E.) जिसकी वित्तीय वर्ष में कुल आय रु. 2.50 लाख से अधिक हो, उन्हें ई-रिटर्न जमा करना अनिवार्य किया गया है।

18. कुल आय को 10 के निकटतम अंक तक राऊंड अप करने के पश्चात् प्राप्त कुल आय पर निर्धारित दर से कुल आयकर की गणना की जानी चाहिए। आयकर विवरणी नियत तिथि तक फाईल नहीं करने पर विलम्ब शुल्क: वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए कर निर्धारण यर्थ 2021-22 में नियंत द्विनांक तक रिटर्न फाईल नहीं किया जाता है तो विलंबित रिटर्न कर निर्धारण वर्ष के अन्तिम दिनांक 31 मार्च तक रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। परन्तु इसके लिए निम्नानुसार विलम्ब शुल्क देय
होगा:

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