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Bird flue बर्ड फ्लू क्या है ? H5N1 वायरस , लक्षण एवं बचाव के उपाय

बर्ड फ्लू फ्लू Bird flue H5N1 वायरस या चिड़ियों का इन्प्लुएन्जा, एक विषाणुजनित रोग है। यह विषाणु मुर्गी एवं अन्य चिड़ियों पर आश्रय पाता है। फ्लू का कारण एवियन इन्फ्लूएंजा( H5N1 वायरस ) बचाव- पक्षियों के संपर्क में आने से बचें.

बर्ड फ्लू Bird flue क्या है ?

बर्ड फ्लू की बीमारी एवियन इन्फ्लूएंज़ा वायरस H5N1 की वजह से होती है। यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो इन्फ्लुएंज़ा टाइप-ए वायरस के कारण होती है और आमतौर पर मुर्गियों और टर्की जैसी पक्षियों को प्रभावित करती है। यह वायरस पक्षियों के अलावा इंसानों को भी अपना शिकार बनाता है। बर्ड फ्लू Bird flue मुर्गी, टर्की, गीस, मोर और बत्तख जैसे पक्षियों में तेज़ी से फैलता है। यह इन्फ्लूएंज़ा वायरस इतना ख़तरनाक होता है कि इससे इंसान और पक्षियों की मौत भी हो सकती है। अभी तक का बड़ा कारण पक्षियों को ही माना जाता है, लेकिन कई बार यह इंसान से इंसान को भी हो जाता है।

H5N1 वायरस के खतरे से बचने के लिए हमें पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए. पोल्ट्री फार्म के पक्षियों के संक्रमित होने के बाद इंसान के बीच इसके फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है. पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से भी ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है.

बर्ड फ्लू की बीमारी एवियन इन्फ्लूएंज़ा वायरस h5n1 की वजह से होती है। यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो इन्फ्लुएंज़ा टाइप-ए वायरस के कारण होती है और आमतौर पर मुर्गियों और टर्की जैसी पक्षियों को प्रभावित करती है। यह वायरस पक्षियों के अलावा इंसानों को भी अपना शिकार बनाता है। बर्ड फ्लू इंफेक्शन मुर्गी, टर्की, गीस, मोर और बत्तख जैसे पक्षियों में तेज़ी से फैलता है। यह इन्फ्लूएंज़ा वायरस इतना ख़तरनाक होता है कि इससे इंसान और पक्षियों की मौत भी हो सकती है। अभी तक बर्ड फ्लू का बड़ा कारण पक्षियों को ही माना जाता है, लेकिन कई बार यह इंसान से इंसान को भी हो जाता है।
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पक्षियों से इंसानों में कैसे फैलता है बर्ड फ्लू

⭕पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है. ज्यादातर बर्ड फ्लू बीमारी से ग्रस्त पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में आने से फैलता है. जैसे डोमेस्टिक पोल्ट्री फार्म के पक्षियों के संक्रमित होने के बाद इंसान के बीच इसके फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

क्या बर्ड फ्लू इंसानों में आसानी से फैल जाता है?

नहीं ये आसानी से इंसानों में नहीं फैलता। आमतौर पर अगर इंसान किसी ऐसे पक्षी के संपर्क में आए जो H5N1 से संक्रमित हो (ज़िंदा या मृत), तो उन्हें भी बर्ड फ्लू हो सकता है। WHO के अनुसार, आमतौर पर एक इंसान से दूसरे में नहीं फैलता। ऐसे भी कोई मामले सामने नहीं आए हैं, जहां लोगों को अच्छी तरह पकाए हुए मुर्गे या उसके अंडे खाकर बर्ड फ्लू हुआ हो। ये वायरस गर्म तापमान सहन नहीं कर सकता, इसलिए पकाए जाने पर मर जाता है।

कितना जानलेवा है बर्ड फ्लू?

बर्ड फ्लू मनुष्यों में काफी दुर्लभ है, लेकिन अगर ये संक्रमण हो जाए, तो जानलेवा भी साबित हो सकता है। WHO के मुताबिक, H5N1 से जो संक्रमित हुए हैं, उनमें से 60 प्रतिशत की मृत्यु हुई है। हालांकि, एसिम्पटोमैटिक मामले इस आंकडे में शामिल नहीं हैं। इसके इलाज के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय एंटीवायरल दवाओं की सलाह देता है, खासतौर, पर ओसेलटमेविर (टैमीफ्लू), जिससे रोगी की जान बचने के आसार बढ़ जाते हैं। कई मामलों में फ्लू संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है और रोगी को अस्पताल भर्ती कराना पड़ता है। इसलिए मंत्रालय ने खासतौर पर पोल्ट्री में काम करने वाले लोगों को PPE किट का इस्तेमाल करने और साथ ही हाथों की स्वच्छता बनाए रखना की सलाह दी है।

फिर क्यों बर्ड फ्लू से डर रहे हैं लोग?

H5N1 एक गंभीर और जानलेवा वायरस है, जिसकी वजह से 10 में 6 इंसानों अभी तक मौत हो चुकी है। अगर वायरस म्यूटेट हो जाता है और अपने आकार में बदलाव कर इंसानी सेल को पकड़ लेता है और इंसान से इंसान में आसानी से फैलने लगता है, तो ये एक महामारी का रूप भी ले सकता है। फ्लू के वायरस आसानी से म्यूटेट कर जाते हैं, क्योंकि उनमें खंडित जीनोम होता है। अभी तक हम जितने भी फ्लू के बारे में जानते हैं, जैसे मौसमी फ्लू और कोरोना वायरस, इसी तरह म्यूटेट करके पक्षियों से इंसानों में फैलने शुरू हो गए।

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बर्ड फ्लू के लक्षण क्या है –

⭕पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है. ज्यादातर बर्ड फ्लू बीमारी से ग्रस्त पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में आने से फैलता है. जैसे डोमेस्टिक पोल्ट्री फार्म के पक्षियों के संक्रमित होने के बाद इंसान के बीच इसके फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
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⭕बर्ड फ्लू के लक्षण आमतौर पर होने वाले फ्लू के लक्षणों से काफी मिलते-जुलते हैं. H5N1 इंफेक्शन की चपेट में आने पर आपको खांसी, डायरिया, रेस्पिरेटरी में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, नाक बहना या गले में खराश की समस्या हो सकती है.

बर्ड फ्लू से बचाव कैसे करें- बचाव के उपाय जानिए

⭕बर्ड फ्लू के लक्षण आमतौर पर होने वाले फ्लू के लक्षणों से काफी मिलते-जुलते हैं. H5n1 इंफेक्शन की चपेट में आने पर आपको खांसी, डायरिया, रेस्पिरेटरी में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, नाक बहना या गले में खराश की समस्या हो सकती है.
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  • सीधे संपर्क से बचें- H5N1 ( बर्ड फ्लू) वायरस के खतरे से बचने के लिए हमें पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए▪️
  • छत पर रखी टंकियों, रेलिंग या पीजरों को साफ करें। पक्षी के मल या संबंधित स्थानों पर सावधानीपूर्वक पंख या कचरा फैलाएं। खुली हाँथों के साथ पक्षियों को न बांधें, उनसे एक निश्चित दूरी बनाए रखें।
  • संक्रमित एक पक्षी लगभग 10 दिनों के लिए मल या लार के माध्यम से वायरस को छोड़ सकता है।▪️
  • कच्चा मांस- सतह को स्पर्श न करें दुकान से चिकन खरीदने के बाद, इसे धोते समय, हाथों और मुंह पर दस्ताने जरूर पहनें। कच्चा मांस या अंडा इंसान को संक्रमित भी कर सकता है। आप दूषित सतह के माध्यम से भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए पोल्ट्री फार्म या दुकानों पर किसी भी चीज या सतह को छूने से बचें। किसी भी चीज को छूने के बाद तुरंत हाथों को साफ करें।▪️
  • अच्छी तरह से पकाएं और खाएं – चिकन को लगभग 100 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पकाएं। कच्चा मांस या अंडा खाने की गलती न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस गर्मी के प्रति संवेदनशील है और खाना पकाने के तापमान में नष्ट हो जाता है। कच्चे मांस या अंडे को अन्य खाद्य पदार्थों से अलग रखा जाना चाहिए।▪️
  • पका हुआ खाना न खाएं – आपने अक्सर लोगों को हाफ बॉइल या हाफ फ्राइड एग्स खाते हुए जिम जाते देखा होगा। फ्लू से बचाव के लिए इस आदत को तुरंत बदलें। अंडरकूकड चिकन या अंडे खाने से आप बीमार हो सकते हैं।

कैसे होता है बर्ड फ्लू का इलाज?

⭕मनुष्यों में ज्यादातर मामलों में एवियन इन्फ्लूएंजा एक गंभीर बीमारी के रूप में विकसित होता है। इसका इलाज अस्पताल में तुरंत किया जाना चाहिए। आइसीयू की आवश्यकता हो सकती है। इसके इलाज में आमतौर पर एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का इस्तेमाल किया जाता है।

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