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MP Budget 2022: किसानों की ऋण माफी के लिए बजट में नहीं होगा प्रविधान ये है इसकी वजह Digital Education Portal

MP Budget 2022: किसानों की ऋण माफी योजना के लिए 2020-21 में दो हजार करोड़ रुपये का किया था प्रविधान।

2021-22 में सिर्फ प्रतीकात्मक राशि रखी थी बजट में

MP Budget 2022: भोपाल। (राज्य ब्यूरो)। कांग्रेस की सत्ता में वापसी का बड़ा आधार बनी किसानों की ऋण माफी योजना के लिए बजट में प्रविधान नहीं होगा। शिवराज सरकार ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों पर पड़े आर्थिक भार को देखते हुए वर्ष 2020-21 में दो हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया था। इसमें से आठ सौ करोड़ रुपये समिति को दिए गए थे लेकिन अब प्रविधान नहीं होगा।

मालूम हो कि भाजपा कमल नाथ सरकार की ऋण माफी योजना को किसानों के साथ सबसे बड़ा धोखा करार दे चुकी है। वर्ष 2021-22 में बजट में इस योजना के लिए सिर्फ प्रतीकात्मक राशि रखी गई थी। सहकारी समितियों से हर साल लगभग 25 लाख किसान कर्ज लेते हैं।

कमल नाथ सरकार ने प्रदेश के 51 लाख से ज्यादा कर्जदार किसानों का ऋण माफी योजना लागू की थी। वर्ष 2019-20 में इसके लिए तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान किया गया था। कर्ज माफी के पहले चरण में चालू खाते पर पचास हजार और कालातीत खाते पर दो लाख रुपये तक कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। दूसरे चरण में चालू खाते पर एक लाख रुपये तक का ऋण माफ होना था।

यह प्रक्रिया प्रारंभ होती, उसके पहले सत्ता परिवर्तन हो गया। हालांकि, भाजपा द्वारा लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा कि किसी किसान की ऋण माफी नहीं हो रही है। जो किसान नियमित तौर पर ऋण अदायगी करते थे उन्होंने भी ऋण माफी की आस में अदायगी बंद कर दी और वे डिफाल्टर हो गए। इसको लेकर सियासत भी खूब हुई। जब भाजपा सरकार बनी तो पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि मंत्री कमल पटेल ने स्वीकार किया कि 20 लाख 23 हजार 136 प्रकरणों में सात हजार 108 करोड़ रुपये का ऋण माफ हुआ।

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कांग्रेस ने इसे मुद्दा भी बनाया पर उपचुनावों में कोई लाभ नहीं हुआ। बजट में भी दो हजार करोड़ रुपये का प्रविधान रखा था पर आठ सौ करोड़ रुपये ही सहकारी समितियों को दिए गए। इससे उस राशि की भरपाई हो गई जो कालातीत ऋण में समायोजित की गई थी। चूंकि, योजना कांग्रेस सरकार की थी और उसका भी क्रियान्वयन नहीं हुआ इसलिए वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में प्रविधान प्रस्तावित नहीं किया गया है। इसके स्थान पर किसानों के लिए अन्य योजनाओं में प्रविधान किया जाएगा।

पटवा सरकार ने भी की थी कर्जमाफी – कमल नाथ सरकार से पहले भाजपा की सुदर लाल पटवा सरकार ने 1990 में कर्जमाफी की घोषणा की थी।

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ब्याज रहित ऋण के लिए एक हजार करोड़ का होगा प्रविधान

किसानों को खरीफ और रबी फसलों के लिए ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने एक हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया जाएगा। यह राशि जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इसी तरह मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना में भी लगभग दो हजार करोड़ रुपये रखे जाएंगे। यह राशि उपार्जन करने वाली एजेंसियों को दी जाएगी। किसानों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए करीब पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान रखा जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा में राज्यांश मिलाने के लिए दो हजार करोड़ रुपये रखे जाएंगे।

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