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💥Mp Panchayat Election 2022 Big Breaking 💥 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : बिना OBC आरक्षण के कराए जाएंगे चुनाव, दो हफ्ते के भीतर निर्वाचन आयोग को अधिसूचना जारी करने के निर्देश

MP Panchayat Election 2022: मध्य प्रदेश में पंचायत और नगर निगम चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रदेश में बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव होंगे। कोर्ट ने 15 दिन में पंचायत एवं नगर पालिका, नगर निगम चुनाव की अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश सरकार नहीं बता सकी पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर बड़ा फैसला सुनाया है। प्रदेश सरकार कोर्ट में यह साबित नहीं कर सकी कि अन्य पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में आरक्षण मिलना चाहिए। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने बिना आरक्षण के ही पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार की मांग को दरकिनार करते हुए 15 दिन में पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम चुनावों की अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर दिया यह निर्णय

 
मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव 2022 को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने जो दिशा निर्देश जारी किया है उससे रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में यह बात क्लीयर हो गई है कि अब प्रदेश में बिना OBC आरक्षण के ही पंचायत चुनाव होंगे।

राज्य चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है कि बिना ओबीसी के चुनाव कराए जाएं। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इसके लिए 2 हफ्ते में अधिसूचना जारी की जाएं।

पंचायत चुनाव 2022 सुप्रीम कोर्ट के बिंदु:-

  • 💁मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
  • 💁बिना OBC आरक्षण के होंगे चुनाव
  • 💁राज्य चुनाव आयोग चुनाव करवाए: सुप्रीम कोर्ट
  • 💁2 हफ्ते में अधिसूचना जारी करें: सुप्रीम कोर्ट
  • 💁‘5 साल में चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी’
  • 💁‘ट्रिपल टेस्ट पूरा करने के लिए और वक्त नहीं दिया जा सकता’
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर हो रहा है और यह कह रहा है, कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने समय बर्बाद किया है, वही प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ तौर पर कहा है विस्तृत अध्ययन के बाद आगे की रणनीति तय होगी CM ने कहा प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के साथ ही चुनाव कराने के पक्ष में है वो और इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी लगाएंगे, नगरी निकाय मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। कानूनी पहलू पर अगर बात की जाए तो तब तक रिव्यू पिटिशन दायर नहीं की जा सकती जब तक यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर हो रहा है और यह कह रहा है, कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने समय बर्बाद किया है, वही प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ तौर पर कहा है विस्तृत अध्ययन के बाद आगे की रणनीति तय होगी CM ने कहा प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के साथ ही चुनाव कराने के पक्ष में है वो और इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी लगाएंगे, नगरी निकाय मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। कानूनी पहलू पर अगर बात की जाए तो तब तक रिव्यू पिटिशन दायर नहीं की जा सकती जब तक यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

तीन साल से लंबित चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में प्रदेश में तीन साल से पंचायत और नगर निगम चुनाव नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 5 साल में चुनाव करवाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। 15 दिन में अधिसूचना जारी करें। ओबीसी आरक्षण के लिए तय शर्तों को पूरा किए बिना आरक्षण नहीं मिल सकता। सरकार की ओर से ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट पेश की गई थी। उसमें दावा किया गया था कि मध्य प्रदेश में 48% आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग की है। इस आधार पर इस वर्ग को कम से कम 35% आरक्षण मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट को अधूरा माना। कोर्ट ने कहा कि बिना ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट के आरक्षण लागू नहीं कर सकते। ऐसे में प्रदेश में अब बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव होंगे। 

मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव अपडेट रोटेशन प्रक्रिया से चुनाव कराने तक

कांग्रेस नेता सैयद जफर और जया ठाकुर ने प्रदेश में पंचायत चुनाव में रोटेशन प्रक्रिया को अपनाने की याचिका दायर की थी। इस याचिका की सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से ओबीसी आरक्षण को लेकर जवाब मांगा था। सरकार ने दिसंबर 2021 में रिपोर्ट तैयार करने का समय मांगा था। समयसीमा समाप्त होने पर कोर्ट ने सरकार को 5 मई को फटकार लगाई। अगले ही दिन रिपोर्ट पेश करने को कहा था। सरकार ने 600 पेज की रिपोर्ट कोर्ट में 6 मई को पेश की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर बड़ा फैसला सुनाया है। प्रदेश सरकार कोर्ट में यह साबित नहीं कर सकी कि अन्य पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में आरक्षण मिलना चाहिए। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने बिना आरक्षण के ही पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार की मांग को दरकिनार करते हुए 15 दिन में पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम चुनावों की अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।

पंचायत चुनाव के बारे में 1993 से अब तक पांच चुनाव

प्रदेश में आरक्षण के नियम बनने के बाद 1993 से अब तक पांच चुनाव हुए हैं। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 20 और अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनुसूचित जनजाति को 20 प्रतिशत और अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, लेकिन ओबीसी को कोई आरक्षण नहीं मिलेगा। 

राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने को तैयार 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल करने को तैयार हैं। अधिसूचना जारी करने के लिए 15 दिन का समय पर्याप्त है। हम तो आज भी अधिसूचना जारी कर सकते हैं। हमें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार था। अब आदेश आ गया है तो हम फैसले की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं। अगर राज्य सरकार रिव्यू पिटीशन लगाती है तो उस पर आने वाले फैसले का पालन करेंगे।  

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